CHHATTISGARH

न्यायालय ने दृष्टिहीन नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सौतेले पिता और रिश्ते में नाना को आजीवन अंतिम सॉस तक की उम्र कैद की सजा सुनाई

विकास कुमार सोनी

न्यायालय ने दृष्टिहीन नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सौतेले पिता और रिश्ते में नाना को आजीवन अंतिम सॉस तक की उम्र कैद की सजा सुनाई

सूरजपुर, (छत्तीसगढ़): एक चौकाने वाले और दिल दहला देने वाले मामले में सूरजपुर की फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने एक दृष्टिहीन नाबालिग लड़की से बार-बार दुष्कर्म करने के आरोप में उसके सौतेले पिता और रिस्ते में लगने वाले नाना को अंतिम सॉस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ओड़गी थाना क्षेत्र के इस मामले ने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने दोनो दोषियों को उनके जघन्य अपराधों के लिए यह कठोर सजा सुनाई। सौतेले पिता को मिली आजीवन कारावास की सजा मुख्य आरोपी, सौतेला पिता वंशलाल, वर्ष 2022 से 2024 तक नाबालिग लड़की के साथ लगातार दुष्कर्म करता रहा। अदालत ने वंशलाल को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत् दोषी पाया और उसे जीवन की अंतिम सॉस तक कारावास और 1000 रूपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई। नाना भी हुआ दोषी दूसरे दोषी, धर्मेन्द्र गुर्जर, जो रिश्ते में लड़की का नाना है उसने भी इस क्रूरता में हिस्सा लिया। अदालत ने पाया कि 09 जुलाई 2024 को जब सौतेले पिता द्वारा जबरन बलात्कार करने के उसी दिन घटना के एक-दो घंटे के उपरांत दूसरे दोषी धर्मेन्द्र गुर्जर ने नाबालिग बालिका, नेत्रहीन होना जानते हुये दिव्यांगता का फायदा उठाकर जबरन अपने घर के अंदर ले जाकर कमरे में बंद कर उसके साथ दुष्कर्म किया। धमेन्द्र गुर्जर को भी पॉक्सो एक्ट की धारा-6 के और धारा 127 बी.एन.एस. के तहत् दोषी ठहराया और उसे भी अंतिम सॉस तक आजीवन कारावास और 1000 रूपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा धारा-127 बी.एन.एस. के तहत् उसे 1 वर्ष का कठोर कारावास और और 500 रूपये का अतिरिक्त जुर्माना भी भरना होगा। अदालत का यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है कि मासूमों के खिलाफ ऐसे घिनौने अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, खासकर तब जब अपराधी ही उनका संरक्षक हो। शासन की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री नरेश कौशिक ने इस मामले की पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप दोनों दोषियों को आजीवन अंतिम सॉस तक की सजा मिली।

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